घनश्यामसिंह राजवी चंगोई द्वारा स्वयं रचित पद्य रचनाये
दोहा चौपाई छंद
सोरठा
कुंडलिया छंद
कुंडलिया छंद
कुंडलिया जानो लिखो, करो छंद का ध्यान !
दो पंक्ति हों दोहे की, बाकी रोला जान !!
बाकी रोला जान, लिखो कुछ खास अदब से !
रोला की शुरुआत, दोहे के चौथे पद से !!
प्रथम शब्द या युग्म, अंत में वापिस मिलिया !
‘श्याम’ सर्प की पूंछ, छुए फन बन कुंडलिया !!
.........
गणेश वंदना
“”””””””’’””
वक्रतुण्ड महाकाय त्वम, कोटिक सूर्य समान !
निर्विध्नं मम काज करो, हे गणेश भगवान !!
हे गणेश भगवान, लम्बोदर एक़दन्ता !
मूषक के असवार, अहंतासुर के हन्ता !!
नमित ‘श्याम’ कर जोड़, गणपति विनायक गजमुंड!
कृपा करो गणराज, हे धुम्रकेतु वक्रतुण्ड !!
(इस कुण्डली में भगवान गणेश के 12 नाम हैं)
✍️ घनश्यामसिंह राजवी चंगोई
(13 जनवरी 2018)
**********
शिव वन्दना
""""""""
शिव शंकर कैलाशपति, शंभू डमरुधारी !
महादेव परमेश्वर, हे भोले भंडारी !!
हे भोले भंडारी, कृपा भक्त पर कीजे !
आया हूं तेरे द्वार, शरण में मोहे लीजे !!
त्व नमन करे घनश्याम,पशुपति हे गंगाधर !
काशीपति भोलेनाथ, जटाधर शिव शंकर !!
✍️ घनश्यामसिंह राजवी चंगोई
(13 फरवरी 2018- शिवरात्रि)
********
सरस्वती वंदना
“”””””””’’’’’’
अभिनन्दन मां शारदे, धरूं तिहारो ध्यान !
किरपा मो पर कीजिये, दे हिरदै मैं ज्ञान !
दे हिरदै मैं ज्ञान, मात शरण मोय लीजे !
कलम उठे हित देश, मां मोय वर ये दीजे !
नमित ‘श्याम’ कर जोड़, मात की आया शरणन !
बसन्तपंचमी पर्व, पर आप का अभिनन्दन !!
✍️ घनश्यामसिंह राजवी, चंगोई
(बसन्तपंचमी - 22 जनवरी 2018)
************
करणी वन्दना
“”’’’’’’’’’’’’’’’’’
शक्ति रूपेण संस्थिता, सर्वभूतेषु मात !
कृपा अपनी राखज्यो, मुझ पर करणी मात !!
मुझ पर करणी मात, बात तुम सुणजो मोरी !
सब उपाय कर हार, शरण मैं आयो तोरी !!
नमित ‘श्याम’ कर जोड़, करूं नित तोहरी भक्ति !
कर कष्टन को दूर, वर मोहे दीजे शक्ति !!
**********
राधा कृष्ण
श्याम चरावत मधुवन में, ग्वाल बाल सँग धेन !
यमुना तट पर लरि गए, राधाजु संग नैन !!
राधाजु संग नैन, चैन फिर छीन्यो सारो!
ग्वालन सौं अरदास, करत कान्हो बेचारो !!
‘इक बर मोहि दिखाय, दे राधाजू को धाम !
माखन तोय खिलाय दूं’ करै चिरौरी ‘श्याम’ !!
**************
गोरखपुर महोत्सव
“‘’’’’’’’’”””””””””’’
बोतल नइ में पेश है, फिर से वही शराब !
गोरखपुर में देखिए, सैफई का शबाब !!
सैफई का शबाब, सुने होंगे तुम चरचे !
‘पार्टी विद डिफरेंस’, सवा करोड़ हैं खरचे !!
नेताओ की भीड़, बुक हुये सारे होटल !
कारोबारी खुश, बिक रही महंगी बोतल !!
**********
जनता धन की लूट है, लूट सके तो लूट !
लूट के भाग विदेश को, तुझको पूरी छूट !!
तुझको पूरी छूट, नहीं अब वापस आना !
आये निकट चुनाव, चंदा पूरा भिजवाना !!
सांच कहे ‘घनश्याम’,बैंक को काहू चिंता !
कर देगी भरपाई, तैयार खड़ी है जनता !!
(15 फरवरी 2018)
बधाई
“””””
प्रफुल्लित अति आज है, इंद्रपुरा परिवार !
राबड़ियाद परिवार में, हो रहा मंगलाचार !!
हो रहा मंगलाचार, चंगोईगढ़ में भारी !
धन्य हमारे भाग्य, पधारे कृष्ण मुरारी !!
अभिजीत-मनु की जोड़ी, बनी रहे अपरिमित !
घनश्याम हृदय है, आज अति प्रफुल्लित !!
(12 फरवरी 2018)
***********
नव वर्ष
“”””””
बधाई नववर्ष की खुश रहें सब लोग,
हर्ष भरा जीवन हो, रहे दूर दुख-रोग!
रहे दूर दुख-रोग जग में नाम कमाएं,
प्रगति के पथ पर निरंतर बढ़ते जाएं!
आज बधाई स्वीकारें ‘घनश्याम’ की,
कृपा आप पर बनी रहे प्रभु राम की!
(1 जनवरी 2019)
..........
आंख्यां पाड़ उडीकिया नीं आया करसा याद !
खळा भिजोवण ताँय अब रोज करै कुचमाद !
रोज करै कुचमाद आध कर दीनी पैल्यां ही !
रयो - सयो खोसण नै अब पड़ग्यो गैल्यां ही !
बेमौसम रा मेह रामजी जमां रुळाय नाख़्या !
आय पड़ी 'घनश्याम' अब करसां री आंख्यां !!
ठंडी करड़ी ठाकरां नित न्हाणो द्यो छोड,
जीमो गर्म जमावणा सांठी ओढो सोड़ !
सांठी ओढो सोड़ नितर बुगची बण ज्यास्यो,
सीधी हुसी मरोड़ ठंड मं जद झल ज्यास्यो !
जाणो पड़ ज्या बा'र पेरज्यो मोटी बंडी,
ऊपर पैरो कोट पड़ै है करड़ी ठंडी !!
......
*नौतपै री कुण्डलिया*
रोहणी म सूरज बड़्यो, नौतप आयो खास,
लूवां चाली जोर री, पारो चढ्यो पचास!
पारो चढ्यो पचास, जीव जूणी झुळसायी,
पवन देव री दया, रेत सँग ठंड बरसायी!
देखा देखी इंद्र करी, जद किरपा सोवणी,
बरस्यो मेह घनश्याम, जद गळी रोहणी !!
1 June 20
लूवां लपटां ले रयी, तपै तावड़ो तेज,
जीव रुल रिया रामजी, बेगी बिरखा भेज !
बेगी बिरखा भेज, तावड़ा सया न जार्या,
मिनख जिनावर पेड़, पखेरू सै मुरझार्या !
'घनश्याम' अणूति बळत, सूकियो पाणी कूवां,
पेड़ बळै ज्यूं लाय, चालरी कोजी लूवां !!
28 may 2020
………...
*आखातीज री खीच*
देसी रयी न बाजरी, मोठ ह साठी ब्रांड !
उंखल मूसल ना रया, रया न हारा हांड !!
रया न हारा हांड, कियां सीजै अब मसकै !
हिम्मत कूटण नांय, गोरड़ी पैली टसकै !!
पैली री कर होड, खाय लेवै जे बेसी !
कर देवै ओचाट, रयो नीं घी भी देसी !!
........
लिछमी नै बुलांवता, घी रा दीपक चास,
अब बिजळी री लड़ चसै, पट्टाखां री बांस !
पट्टाखां री बांस, सांस काठी घुट ज्यावै,
बाजै धूम-धड़ाम, लिछमी डर पाछी जावै !
दस दिन तांई लाग, सफाई करी ही आछी,
कर दीनी 'घनश्याम’, पटाखां गंदगी पाछी !!
………
नारी तू नारायणी नर की पालक मात,
जननी धर्म निभा रही अर्धनग्न है गात !
अर्धनग्न है गात बाल दुधपान कराती,
जंगल लकड़ी बीन गाड़ी घर की चलाती !
संघर्षों की राह मगर है हिम्मत भारी,
जीवन पथ है कठिन मगर ना हारी नारी !!
*****
संविधान का बन रहा, पल-2 बड़ा मजाक !*
*पूरब से पच्छिम तलक, बस ईडी की धाक !*
*बस ईडी की धाक, मगर जनता है भोली !*
*घोड़ों का व्यापार , लग रही ऊंची बोली !*
*बस कुर्सी की भूख,नहीं है ख्याल मान का !*
*नित-नित देखो रेप, हो रहा संविधान का !!*
.........
वंदे भारत ट्रेन से भिड़ गइ काली भैंस,
बहुत बजाई बीन पर उसको ना था सैंस !
उसको ना था सैंस बिगड़ा रेल का हुलिया,
कर गई भीतरमार जाम हुआ फिर पहिया!
नींबू मिर्ची टांग कराओ कहीं जियारत,
(या)बुलवा योगी नाम बदल दो वंदे भारत !!
........
महंगाई की कुंडलियां….
महंगाई क डंक सूं जनता सारी त्रस्त,
सत्ता छीनाझपट मं नेता सारा व्यस्त !
नेता सारा व्यस्त पकड़ सत्ता गी सीढ़ी,
मित्र भाई भतीज तर रयी सातूं पीढ़ी !
मीडिया हुयो मस्त बँट रयी खूब मलाई,
जनता गै ही 'श्याम' भाग लिखी महंगाई !!
.........
बीता फागुन बावरा, आया ज्यों मधुमास,
नव कोंपल फूटन लगी, छाई बास सुवास!
छाई बास सुवास, भ्रमर गूंजे बगियन में,
पंछी करते शोर, फुदकते वन उपवन में !
चढ़ा अचानक पारा, जल अंखियन का रीता,
'श्याम' लगत मधुमास, आन से पहले बीता !
........
जाति है कि जाती नहीं, भेद रही उपजाय !
नेताओं को चुनाव में, करती बहुत सहाय !!
करती बहुत सहाय, अजब है इसकी माया !
फैल देश पर रहा, जाति का काला साया !!
घनश्याम विकास से, अधिक इसीकी है ख्याति
महामहिम जी से भी बड़ी पहचान है जाति !!
********
अब द्हेज-दिखावा-दारु क्षत्रिय दीमक तीन,
झूठी मूंछ मरोड़ में हो रहे दिन-दिन हीन !
हो रहे दिन-2 हीन जा रहे और पिछड़ते,
बना नाक का प्रश्न रोज आपस मे लड़ते !
गर लड़ना ही है तो लड़ो कुरीतियों से सब,
बचा नहीं घनश्याम कोई जीने का रस्ता अब !!
.......
भ्राता कहूं या मित्र कहूं, या दूजा दूं कोई नाम ,
इस शुभ दिन पर आपको, मेरा मधुर प्रणाम !
मेरा मधुर प्रणाम, आज वय हुई साठ है,
पुरखों का आशीर्वाद, आज सब ठाठ-बाठ है !
षष्ठिपूर्ति दिवस आज, यह याद दिलाता,
वरिष्ठ नागरिक हुए आज, मेरे अग्रज भ्राता !!
......
कोरोना की कुण्डलिया*
*मानव* ने निज दम्भ में, किया प्रकृति का नाश,
अपने हाथों ही स्वयं, अपना किया विनाश !
अपना किया विनाश, आज बोले सिर चढ़कर
मकड़ी ज्यूं मर रहा, स्वयं के जाल में फँस कर !
देव वृति को छोड़, बन गया कैसे दानव,
ना समझे घनश्याम, अबोध अभी भी *मानव* !!
संकट वेला है बड़ी, रखदो सिर पर हाथ,
नमन करूँ कर जोड़ हे, देशाणा की मात !
देशाणा की मात, आज है विपदा भारी,
भयग्रस्त है देश, करो तुम सिंह सवारी !
कोरोना को मिटा, करो तुम पथ निष्कंटक,
अर्ज करे घनश्याम, मिटाओ देश का संकट !!
20 April 2020
करोना की काट का लॉक डाउन है मंत्र,
पालन करवाने इसे लगा हुआ सब तंत्र,
लगा हुआ सब तंत्र हमारा हित समझाए,
होय नियंत्रण गर सब अनुशासन अपनाएं,
इकोनॉमि, बिजनस छोड़ो सब रोना धोना,
पड़ा रहेगा ठाठ सभी गर बढ़ा करोना !!
15 april 2020
कुंडलिया छंद
कुंडलिया छंद
कुंडलिया जानो लिखो, करो छंद का ध्यान !
दो पंक्ति हों दोहे की, बाकी रोला जान !!
बाकी रोला जान, लिखो कुछ खास अदब से !
रोला की शुरुआत, दोहा चौथेय पद से !!
प्रथम शब्द या युग्म, अंत में वापिस मिलिया !
‘श्याम’ सर्प की पूंछ, छुए फन बन कुंडलिया !!
.........
गणेश वंदना
“”””””””’’””
वक्रतुण्डा महाकाय, कोटिक सूर्य समान !
कर निर्विध्नं काज मम, हे गणेश भगवान !!
हे गणेश भगवान, लम्बोदर एक़दन्ता !
मूषक के असवार, अहंतासुर के हन्ता !!
नमित ‘श्याम’ कर जोड़, गणपति विनायक गजमुंड!
कृपा करो गणराज, धुम्रकेतु वक्रतुण्डा !!
(इस कुण्डली में भगवान गणेश के 12 नाम हैं)
✍️ घनश्यामसिंह राजवी चंगोई
(13 जनवरी 2018)
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शिव वन्दना
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शिव शंकर कैलाशपति, शंभू डमरुधारी !
महादेव परमेश्वर, हे भोले भंडारी !!
हे भोले भंडारी, कृपा भक्त पर कीजे !
आया हूं तेरे द्वार, शरण में मोहे लीजे !!
त्व नमन करे घनश्याम,पशुपति हे गंगाधर !
काशीपति भोलेनाथ, जटाधर शिव शंकर !!
✍️ घनश्यामसिंह राजवी चंगोई
(13 फरवरी 2018- शिवरात्रि)
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सरस्वती वंदना
“”””””””’’’’’’
अभिनन्दन मां शारदे, धरूं तिहारो ध्यान !
किरपा मो पर कीजिये, दे हिरदै मैं ज्ञान !
दे हिरदै मैं ज्ञान, मात शरण मोय लीजे !
कलम उठे हित देश, मां मोय वर ये दीजे !
नमित ‘श्याम’ कर जोड़, मात की आया शरणन !
बसन्तपंचमी पर्व, पर आप का अभिनन्दन !!
✍️ घनश्यामसिंह राजवी, चंगोई
(बसन्तपंचमी - 22 जनवरी 2018)
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करणी वन्दना
“”’’’’’’’’’’’’’’’’’
शक्ति रूपेण संस्थिता, सर्वभूतेषु मात !
कृपा अपनी राखज्यो, मुझ पर करणी मात !!
मुझ पर करणी मात, बात तुम सुणजो मोरी !
सब उपाय कर हार, शरण मैं आयो तोरी !!
नमित ‘श्याम’ कर जोड़, करूं नित तोहरी भक्ति !
कर कष्टन को दूर, वर मोहे दीजे शक्ति !!
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राधा कृष्ण
श्याम चरावत मधुवन में, ग्वाल बाल सँग धेन !
यमुना तट पर लरि गए, राधाजु संग नैन !!
राधाजु संग नैन, चैन फिर छीन्यो सारो!
ग्वालन सौं अरदास, करत कान्हो बेचारो !!
‘इक बर मोहि दिखाय, दे राधाजू को धाम !
माखन तोय खिलाय दूं’ करै चिरौरी ‘श्याम’ !!
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गोरखपुर महोत्सव
“‘’’’’’’’’”””””””””’’
बोतल नइ में पेश है, फिर से वही शराब !
गोरखपुर में देखिए, सैफई का शबाब !!
सैफई का शबाब, सुने होंगे तुम चरचे !
‘पार्टी विद डिफरेंस’, सवा करोड़ हैं खरचे !!
नेताओ की भीड़, बुक हुये सारे होटल !
कारोबारी खुश, बिक रही महंगी बोतल !!
**********
जनता धन की लूट है, लूट सके तो लूट !
लूट के भाग विदेश को, तुझको पूरी छूट !!
तुझको पूरी छूट, नहीं अब वापस आना !
आये निकट चुनाव, चंदा पूरा भिजवाना !!
सांच कहे ‘घनश्याम’,बैंक को काहू चिंता !
कर देगी भरपाई, तैयार खड़ी है जनता !!
(15 फरवरी 2018)
बधाई
“””””
प्रफुल्लित अति आज है, इंद्रपुरा परिवार !
राबड़ियाद परिवार में, हो रहा मंगलाचार !!
हो रहा मंगलाचार, चंगोईगढ़ में भारी !
धन्य हमारे भाग्य, पधारे कृष्ण मुरारी !!
अभिजीत-मनु की जोड़ी, बनी रहे अपरिमित !
घनश्याम हृदय है, आज अति प्रफुल्लित !!
(12 फरवरी 2018)
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नव वर्ष
“”””””
बधाई नववर्ष की खुश रहें सब लोग,
हर्ष भरा जीवन हो, रहे दूर दुख-रोग!
रहे दूर दुख-रोग जग में नाम कमाएं,
प्रगति के पथ पर निरंतर बढ़ते जाएं!
आज बधाई स्वीकारें ‘घनश्याम’ की,
कृपा आप पर बनी रहे प्रभु राम की!
(1 जनवरी 2019)
..........
आंख्यां पाड़ उडीकिया नीं आया करसा याद !
खळा भिजोवण ताँय अब रोज करै कुचमाद !
रोज करै कुचमाद आध कर दीनी पैल्यां ही !
रयो - सयो खोसण नै अब पड़ग्यो गैल्यां ही !
बेमौसम रा मेह रामजी जमां रुळाय नाख़्या !
आय पड़ी 'घनश्याम' अब करसां री आंख्यां !!
ठंडी करड़ी ठाकरां नित न्हाणो द्यो छोड,
जीमो गर्म जमावणा सांठी ओढो सोड़ !
सांठी ओढो सोड़ नितर बुगची बण ज्यास्यो,
सीधी हुसी मरोड़ ठंड मं जद झल ज्यास्यो !
जाणो पड़ ज्या बा'र पेरज्यो मोटी बंडी,
ऊपर पैरो कोट पड़ै है करड़ी ठंडी !!
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*नौतपै री कुण्डलिया*
रोहण मं सूरज बड़्यो, नौतप आयो खास,
लूवां चाली जोर री, पारो चढ्यो पचास!
पारो चढ्यो पचास, जीव जूणी झुळसायी,
पवन देव री महर, रेत सँग ठंड बरसायी!
इंद्रदेव री फेर, हुई जद किरपा सोवण,
बरस्यो मेह घनश्याम, जद गळ गई रोहण !!
1 June 20
लूवां लपटां ले रयी, तपै तावड़ो तेज,
जीव रुल रिया रामजी, बेगी बिरखा भेज !
बेगी बिरखा भेज, तावड़ा सया न जार्या,
मिनख जिनावर पेड़, पखेरू सै मुरझार्या !
'घनश्याम' अणूति बळत, सूकियो पाणी कूवां,
पेड़ बळै ज्यूं लाय, चालरी कोजी लूवां !!
28 may 2020
………...
*आखातीज री खीच*
देसी रयी न बाजरी, मोठ ह साठी ब्रांड !
उंखल मूसल ना रया, रया न हारा हांड !!
रया न हारा हांड, कियां सीजै अब मसकै !
हिम्मत कूटण नांय, गोरड़ी पैली टसकै !!
पैली री कर होड, खाय लेवै जे बेसी !
कर देवै ओचाट, रयो नीं घी भी देसी !!
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लिछमी नै बुलांवता, घी रा दीपक चास,
अब बिजळी री लड़ चसै, पट्टाखां री बांस !
पट्टाखां री बांस, सांस काठी घुट ज्यावै,
बाजै धूम-धड़ाम, लिछमी डर पाछी जावै !
दस दिन तांई लाग, सफाई करी ही आछी,
कर दीनी 'घनश्याम’, पटाखां गंदगी पाछी !!
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नारी तू नारायणी नर की पालक मात,
जननी धर्म निभा रही अर्धनग्न है गात !
अर्धनग्न है गात बाल दुधपान कराती,
जंगल लकड़ी बीन गाड़ी घर की चलाती !
संघर्षों की राह मगर है हिम्मत भारी,
जीवन पथ है कठिन मगर ना हारी नारी !!
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संविधान का बन रहा, पल-2 बड़ा मजाक !*
*पूरब से पच्छिम तलक, बस ईडी की धाक !*
*बस ईडी की धाक, मगर जनता है भोली !*
*घोड़ों का व्यापार , लग रही ऊंची बोली !*
*बस कुर्सी की भूख,नहीं है ख्याल मान का !*
*नित-नित देखो रेप, हो रहा संविधान का !!*
.........
वंदे भारत ट्रेन से भिड़ गइ काली भैंस,
बहुत बजाई बीन पर उसको ना था सैंस !
उसको ना था सैंस बिगड़ा रेल का हुलिया,
कर गई भीतरमार जाम हुआ फिर पहिया!
नींबू मिर्ची टांग कराओ कहीं जियारत,
(या)बुलवा योगी नाम बदल दो वंदे भारत !!
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महंगाई की कुंडलियां….
महंगाई क डंक सूं जनता सारी त्रस्त,
सत्ता छीनाझपट मं नेता सारा व्यस्त !
नेता सारा व्यस्त पकड़ सत्ता गी सीढ़ी,
मित्र भाई भतीज तर रयी सातूं पीढ़ी !
मीडिया हुयो मस्त बँट रयी खूब मलाई,
जनता गै ही 'श्याम' भाग लिखी महंगाई !!
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बीता फागुन बावरा, आया ज्यों मधुमास,
नव कोंपल फूटन लगी, छाई बास सुवास!
छाई बास सुवास, भ्रमर गूंजे बगियन में,
पंछी करते शोर, फुदकते वन उपवन में !
चढ़ा अचानक पारा, जल अंखियन का रीता,
'श्याम' लगत मधुमास, आन से पहले बीता !
........
जाति है कि जाती नहीं, भेद रही उपजाय !
नेताओं को चुनाव में, करती बहुत सहाय !!
करती बहुत सहाय, अजब है इसकी माया !
फैल देश पर रहा, जाति का काला साया !!
घनश्याम विकास से, अधिक इसीकी है ख्याति
महामहिम जी से भी बड़ी पहचान है जाति !!
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अब द्हेज-दिखावा-दारु क्षत्रिय दीमक तीन,
झूठी मूंछ मरोड़ में हो रहे दिन-दिन हीन !
हो रहे दिन-2 हीन जा रहे और पिछड़ते,
बना नाक का प्रश्न रोज आपस मे लड़ते !
गर लड़ना ही है तो लड़ो कुरीतियों से सब,
बचा नहीं घनश्याम कोई जीने का रस्ता अब !!
.......
भ्राता कहूं या मित्र कहूं, या दूजा दूं कोई नाम ,
इस शुभ दिन पर आपको, मेरा मधुर प्रणाम !
मेरा मधुर प्रणाम, आज वय हुई साठ है,
पुरखों का आशीर्वाद, आज सब ठाठ-बाठ है !
षष्ठिपूर्ति दिवस आज, यह याद दिलाता,
वरिष्ठ नागरिक हुए आज, मेरे अग्रज भ्राता !!
......
कोरोना की कुण्डलिया*
*मानव* ने निज दम्भ में, किया प्रकृति का नाश,
अपने हाथों ही स्वयं, अपना किया विनाश !
अपना किया विनाश, आज बोले सिर चढ़कर
मकड़ी ज्यूं मर रहा, स्वयं के जाल में फँस कर !
देव वृति को छोड़, बन गया कैसे दानव,
ना समझे घनश्याम, अबोध अभी भी *मानव* !!
संकट वेला है बड़ी, रखदो सिर पर हाथ,
नमन करूँ कर जोड़ हे, देशाणा की मात !
देशाणा की मात, आज है विपदा भारी,
भयग्रस्त है देश, करो तुम सिंह सवारी !
कोरोना को मिटा, करो तुम पथ निष्कंटक,
अर्ज करे घनश्याम, मिटाओ देश का संकट !!
20 April 2020
करोना की काट का लॉक डाउन है मंत्र,
पालन करवाने इसे लगा हुआ सब तंत्र,
लगा हुआ सब तंत्र हमारा हित समझाए,
होय नियंत्रण गर सब अनुशासन अपनाएं,
इकोनॉमि, बिजनस छोड़ो सब रोना धोना,
पड़ा रहेगा ठाठ सभी गर बढ़ा करोना !!
15 april 2020
सवैया छंद
गजल
त्रिभंगी छन्द
अमृत ध्वनि छन्द
छंद रोमकंद
द्विअक्षरी घनाक्षरी छन्द
कहमुकरी
घनाक्षरी छन्द
समाज सुधार गीत
शुभकामनाएं
क्षत्रिय महापुरुष
रानी पद्मिनी
राणी पदमणी (मारवाड़ी)
श्रद्धांजलि
क्षत्रिय धर्म
अभिनंदन_हे_अभिनंदन
नारी तू जगजननी है
बंदे बेशरम : वन्दे मातरम्
पैली हाळा काम रया नी पैली हाळी बाणी
फूट बिकै बेभाव भायला
श्रद्धांजलि रा सोरठा
स्व. राजाजी बृजलालसिंह जी
धर्म धरा पर घट रयो
धरती मां रो दर्द
गांव की पीड़ा
पैली जबरी होळी होंती
ईश्वर अल्लाह तेरे घर से दया कहां पर चली गई ?
एक चंदा नीलगगन मे
किसान उठ
आदमी-आदमी
नेता उठ
हम हैं राही सत्ता के
मेरे देश की धरती, . . . उगले
दामोदरजी घर गिगो जाम्यो
पातल और पीथळ (नई कविता)
स्कूल की यादें
स्वागत नववर्ष
लक्ष्मी
दिवाली रोज़ होती है
जिंदगी
गांव की सरकार
आदमी - आदमी
जागृति आई है
क्षत्रिय अब तो जागो रे
बेरोजगारी की बलि चढ़ रहा क्षत्रिय युवा
दहेज पर कुर्बान बेटियां
केसरिया बालम दारूड़ी नै . . . .
म्हे तो गांव का रैवण हाळा हां
देश का क्षत्रिय सोया है
मालिक का दिया हुआ वरदान बेटियां
कुर्सी मेरी बच जाए
निधि छंद
त्रोटक छंद
जाति जनगणना
