पतिव्रता थी पद्मिनी, देवी दुर्गा रूप। वर पाया वीरांगना, रावल रतनसिंह भूप॥ खिलजी ने ख्याति सुनी, रीझा पद्मिनी रुप। घेरा गढ़ चित्तौड़ को, गर्ज उठे रजपूत॥ “दर्पण में छवि देख लूं” खिलजी का संदेश। “घेरा तोडूं दुर्ग का, जाऊं अपने देश॥” दर्पण देखी पद्मिनी, तन छाई मुर्छान। छल से भूप…
Continue ReadingAuthor: Ghanshyam Singh Rajvi
रानी पद्मिनी – राजस्थानी
पतिव्रता ही पदमणी, देवी दुर्गा रूप। बर पायो बीरांगना, रावळ रतनसी भूप॥ खिलजी ख्याति सुण लई, रीझयो पदमण रुप। कड़ो कोट रै नाखियो, गढ़ चित्तौड़ा चोकूंट॥ सन्देसै सरतां लिखी, दरपण देओ दिखाय। निरखूं राणी रुप नै, लश्कर लेऊं उठाय॥ दर्पण देखी पदमणी, तन छाई मुर्छान। छळ सूं भूप बुलावियो, कैद…
Continue Readingजिंदगी
मालिक ने हमको दिया, उपहार जिंदगी ! जी लो खुशी के पल हैं, ये चार जिंदगी !! गंवा ना देना गफलत, में पल हैं कीमती ! फिर से न मिलेगी ये, बार-बार जिंदगी !! . गर्भ में मां के तो थी, अंधेरा कुआं सी ! बाहर आया तो लगी, उजीयार…
Continue Readingकुंडलियां
गणेश वंदना “”””””””’’””””’” वक्रतुण्ड महाकाय त्वम, कोटिक सूर्य समान ! निर्विध्नं मम काज करो, हे गणेश भगवान !! हे गणेश भगवान, लम्बोदर एक़दन्ता ! मूषक के असवार, अहंतासुर के हन्ता !! नमित श्याम कर जोड़, गणपति विनायक, गजमुँड ! कृपा करो गणराज, हे धुम्रकेतु वक्रतुण्ड !! ✍️ घनश्यामसिंह राजवी चंगोई…
Continue Readingराजाजी श्री बृजलाल सिंह जी
काछ दृढ़ा कर बरसणा, मन चंगा मुख मिट्ठ। रण सूरा जग वल्लभा, सो रजपूतां दिट्ठ ।।
Continue Readingराव बीकाजी
सातां पुरखाँ री सदा, ठावी रहै न ठौड़। साहाँ रा मन संकिया, रण संकै राठौड़ ॥
Continue Readingठिकाना चंगोई
ब्रज देशा, चन्दन वना, मेरु पहाडा मोड़ ! गरुड़ खगां, लंका गढां, राजकुलां राठौड़ !!
Continue Readingपैली हाळा काम रया नी पैली हाळी बाणी
पैली हाळा काम रया नी पैली हाळी बाणी, बदळ गई जिंदगाणी सारी, रयी नीं बात पुराणी। बदळ गई जिंदगाणी सारी, रयी नीं बात पुराणी॥ पैली हाळी कोई बात बाकी नीं रयी, च्यार बजे उठ झोवंती बै ‘चाकी’ नीं रयी। आठ सेर पीसती बै काकी नीं रयी, डांगरा गी ‘फाटक’ कठैई…
Continue Readingराजाजी बृजलालसिंह जी
तीसवीं पुण्यतिथि पर शत-शत नमन ! (स्वर्गवास- सावण सुदी 7, संवत 2044) . * * * * * * गांव चंगोई घणों पुराणों, पण गया पुराणा लोग। नित उठ बां नै नमन करां, बै सगळा आदरजोग॥ बैठ दरवाजै सामनै, हो जेठ चाहे आसोज। आरामकुर्सी-मूढ़ेै ऊपर, हुक्को पीता रोज॥ चोड़ो माथो,…
Continue Readingनेता उठ
नेता उठ ! नेता उठ, पार्टी बना ! नए-2 मुद्दे नारे बना ! जनता को, भाषण दे ! धन्नासेठो से, चंदा ले ! लुभावने, वादे कर ! चुनाव लड़ !! नेता उठ ! नेता उठ, चुनाव लड़ ! शराब पैसा, बांट कर ! जीत जा, विधायक बन ! सांसद बन,…
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